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Body Composition 1 min read

Diabetes और Body Composition का संबंध: Testing क्यों ज़रूरी है

सामान्य वज़न वाले भारतीयों में भी डायबिटीज़ का खतरा क्यों होता है, visceral fat का क्या रोल है, और body composition testing डायबिटीज़ केयर में क्या जोड़ता है।

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Diabetes और Body Composition का संबंध: Testing क्यों ज़रूरी है

2023 में ICMR (Indian Council of Medical Research) ने एक बड़ा आंकड़ा सामने रखा — भारत में 10.1 करोड़ (101 मिलियन) लोग Type 2 diabetes से जूझ रहे हैं, जो दुनिया में किसी भी देश में सबसे ज़्यादा है। इसके साथ 13.6 करोड़ लोग pre-diabetes की स्थिति में हैं — यानी 23 करोड़ से ज़्यादा भारतीय इस बीमारी के किसी न किसी पड़ाव पर हैं।

डायबिटीज़ की जाँच में आमतौर पर वज़न, BMI और blood sugar देखा जाता है। पर रिसर्च अब साफ दिखाती है कि Type 2 diabetes असल में blood test की समस्या बनने से पहले body composition की समस्या होती है — यानी सवाल सिर्फ शुगर का नहीं, चर्बी कहां जमा है, इसका है।

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InBody 770 — क्लिनिकल-ग्रेड body composition analyzer, डायबिटीज़ केयर में इस्तेमाल के लिए उपयुक्त

“Personal Fat Threshold” — भारतीयों में डायबिटीज़ कम वज़न पर भी क्यों होती है

Newcastle University के Professor Roy Taylor के शोध ने एक ज़रूरी सिद्धांत सामने रखा — personal fat threshold। यह वह सीमा है जहां लिवर और पैंक्रियास में जमा चर्बी शरीर की सहनशक्ति से ज़्यादा हो जाती है और metabolic function बिगड़ने लगता है।

यह सीमा हर आबादी में अलग है। पश्चिमी लोगों में डायबिटीज़ आमतौर पर ज़्यादा obesity (BMI 30+) पर होती है। भारतीयों में यह सीमा अक्सर बहुत कम BMI पर आ जाती है — 23-26, या उससे भी कम। यही वजह है कि:

  • भारत में “normal weight diabetics” — यानी BMI 25 से कम पर भी डायबिटीज़ वाले लोग — असामान्य रूप से ज़्यादा हैं
  • भारतीयों में डायबिटीज़ पश्चिमी आबादी के मुकाबले औसतन 10 साल पहले शुरू हो जाती है
  • ICMR-INDIAB स्टडी के मुताबिक भारतीय आबादी में pre-diabetes से diabetes की तरफ बढ़ने की रफ़्तार भी तेज़ है

दूसरी तरफ इसका एक उम्मीद भरा पहलू भी है — चेन्नई की Diabetes Research Foundation के शोध में पाया गया कि भारतीय T2DM मरीज़ों में सिर्फ 5-10% वज़न घटाने से ही काफी metabolic सुधार देखा गया, जबकि UK की स्टडीज़ में 15 किलो तक की कमी चाहिए थी। यानी भारतीयों के लिए ज़रूरी बदलाव अक्सर उतना बड़ा नहीं जितना पश्चिमी डेटा बताता है।

DiRECT ट्रायल: सबूत कि reversal मुमकिन है

The Lancet में 2017 में छपी और 2019 तक अपडेट हुई DiRECT ट्रायल (UK) अब तक का सबसे मज़बूत सबूत है कि body composition बदलने से T2DM remission मुमकिन है:

  • 12 महीनों में 46% प्रतिभागियों में remission पाया गया (बिना दवा के HbA1c 6.5% से कम)
  • जिन्होंने 15 किलो या उससे ज़्यादा वज़न घटाया, उनमें 86% remission rate रहा
  • दो साल बाद भी 36% लोग remission में बने रहे — यानी असर टिकाऊ था, सिर्फ अस्थायी नहीं
  • MRI इमेजिंग ने पुष्टि की कि लिवर और पैंक्रियास की चर्बी क्लिनिकल सुधार के साथ-साथ ही कम हुई

ज़रूरी बात: यह डेटा बताता है कि reversal मुमकिन है, गारंटी नहीं। कितना सुधार होगा यह बीमारी की अवधि, उम्र और व्यक्ति पर निर्भर करता है — और कोई भी बदलाव डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाना चाहिए, खासकर दवा की मात्रा में कोई भी फेरबदल।

Visceral Fat Area (VFA): डायबिटीज़ से सबसे सीधा जुड़ा नंबर

InBody जो पैमाने मापता है, उनमें से Visceral Fat Area (VFA) T2DM से सबसे सीधे जुड़ा है। रिसर्च ने भारतीय आबादी के लिए कुछ अहम सीमाएं तय की हैं:

  • VFA 80 cm² से कम: कम metabolic जोखिम
  • VFA 80-100 cm²: बढ़ा हुआ जोखिम क्षेत्र, शुरुआती insulin resistance की संभावना
  • VFA 100 cm² से ऊपर: ज़्यादा जोखिम, भारतीय आबादी में T2DM से मज़बूत संबंध
  • VFA 130 cm² से ऊपर: बहुत ज़्यादा जोखिम, अक्सर स्थापित T2DM के साथ जुड़ा

HbA1c बताता है कि पिछले 3 महीनों में blood sugar का क्या हुआ। VFA बताता है कि बीमारी की जड़ में मौजूद चर्बी असल में घट रही है या नहीं — दोनों मायने रखते हैं, पर reversal ट्रैक करने के लिए VFA ज़्यादा जानकारी देने वाला मेट्रिक है।

Skeletal Muscle Mass: डायबिटीज़ समीकरण का दूसरा आधा हिस्सा

Skeletal muscle शरीर का सबसे बड़ा glucose-अवशोषित करने वाला अंग है — एक स्वस्थ व्यक्ति में insulin से प्रेरित glucose disposal का 70-80% हिस्सा मांसपेशी संभालती है। कम muscle mass का मतलब है कम glucose-अवशोषण क्षमता, भले ही insulin ठीक से काम कर रहा हो।

भारतीयों में यह और भी अहम है क्योंकि दक्षिण एशियाई शरीर में पहले से ही कम baseline muscle mass पाया जाता है (वही “skinny fat” पैटर्न, जिसकी पूरी जानकारी यहां है: शरीर दुबला-पतला क्यों होता है)। कम visceral fat होने के बावजूद अगर muscle mass भी कम है, तो जोखिम दोनों तरफ से बना रहता है।

Resistance training अकेले, बिना वज़न घटाए भी, glucose disposal में सुधार करती है — यानी सिर्फ वज़न घटाना काफी नहीं, मांसपेशी बचाना और बनाना भी उतना ही ज़रूरी है।

Body Composition टेस्ट डायबिटीज़ केयर में क्या जोड़ता है

  • Visceral Fat Area — सिर्फ कमर का माप या BMI नहीं, बल्कि पेट के अंदर की चर्बी का क्लिनिकल-सटीक अंदाज़ा।
  • Skeletal Muscle Mass — glucose disposal क्षमता का सीधा संकेतक।
  • ECW/TBW Ratio — शरीर में सूजन (inflammation) का एक संवेदनशील मार्कर, जो visceral fat घटने के साथ सामान्य होना चाहिए।
  • समय के साथ ट्रेंड — दवा, डाइट या एक्सरसाइज़ बदलने पर शरीर की बनावट में असल बदलाव माप कर देखा जा सकता है, सिर्फ वज़न के उतार-चढ़ाव से नहीं।

डायबिटीज़ क्लिनिक और एंडोक्राइनोलॉजिस्ट के लिए यह क्यों मायने रखता है

भारत में कई डायबिटीज़ और एंडोक्राइनोलॉजी क्लिनिक अब सिर्फ blood sugar और वज़न से आगे बढ़कर body composition testing को अपने असेसमेंट में जोड़ रहे हैं। स्टैंडर्ड डायबिटीज़ मॉनिटरिंग (HbA1c, fasting glucose) बीमारी का नतीजा मापती है, कारण नहीं। VFA और muscle mass का ट्रैकिंग यह दिखाता है कि इलाज असल में जड़ पर काम कर रहा है या सिर्फ लक्षण को दबा रहा है।

मरीज़ के लिए व्यावहारिक सलाह

  • अगर वज़न और BMI सामान्य है फिर भी परिवार में डायबिटीज़ की history है, तो सिर्फ वज़न कांटे पर निर्भर न रहें — body composition test कराएं।
  • दवा या डाइट में बदलाव के बाद हर 6-8 हफ्ते में दोबारा टेस्ट कराना असल बदलाव पकड़ने का सबसे भरोसेमंद तरीका है।
  • प्रोटीन इनटेक (1.6-2.0 ग्राम/किलो lean mass) और resistance training दोनों साथ चलने चाहिए — सिर्फ कैलोरी घटाने से मांसपेशी भी जा सकती है, जो glucose disposal क्षमता को और कमज़ोर करता है।
  • टेस्ट डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह की जगह नहीं लेता, और दवा में कोई भी बदलाव सिर्फ डॉक्टर की निगरानी में करें — यह उनके साथ मिलकर काम करने का एक अतिरिक्त औज़ार है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

वज़न से आगे देखें

डायबिटीज़ केयर में सिर्फ वज़न कांटे का नंबर पूरी कहानी नहीं बताता। शरीर के अंदर क्या हो रहा है — विसरल फैट, मांसपेशी, सूजन का स्तर — यह जानना इलाज को ज़्यादा सटीक बनाता है।

क्लिनिक या हॉस्पिटल के लिए body composition analyzer के बारे में जानें: inbody.in/body-composition-analyzers.php, या अपना टेस्ट बुक करें inbody.in/inbody-test.php पर। और पढ़ें: BCA test क्या होता है, Body fat कितना होना चाहिए

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