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Body Fat कितना होना चाहिए? भारतीयों के लिए असली आँकड़े
पश्चिमी चार्ट भारतीय शरीर पर खतरा कम करके दिखाते हैं। जानें भारतीयों के लिए body fat और visceral fat की सही सीमाएँ, और कौन-सा नंबर सबसे ज़रूरी है।
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Body Fat कितना होना चाहिए? भारतीयों के लिए असली आँकड़े
इंटरनेट पर body fat कितना होना चाहिए खोजने पर जो चार्ट सबसे पहले मिलते हैं, वे लगभग हमेशा पश्चिमी आबादी के आँकड़ों पर बने होते हैं। भारतीय शरीर पर उन्हें ज्यों का त्यों लगा देना एक गंभीर गलती है — क्योंकि वे खतरे को कम करके दिखाते हैं।
यह लेख बताता है कि भारतीयों के लिए body fat और visceral fat की सीमाएँ अलग क्यों हैं, कौन-सा नंबर सबसे ज़्यादा मायने रखता है, और अपना असली आँकड़ा कैसे पता करें।

पहले यह समझें: भारतीय शरीर अलग क्यों है
शोध में लगातार यह पाया गया है कि एक ही BMI और एक ही वज़न पर भारतीयों के शरीर में पश्चिमी लोगों की तुलना में ज़्यादा चर्बी और कम मांसपेशी होती है। मेडिकल साहित्य में इसे अक्सर “thin-fat” पैटर्न कहा जाता है।
इसका सीधा असर दिशानिर्देशों पर पड़ा है। ICMR और WHO Asia-Pacific मानक भारतीयों के लिए BMI की सीमाएँ कम रखते हैं:
| श्रेणी | भारतीय / एशियाई BMI | पश्चिमी BMI |
|---|---|---|
| सामान्य | 18.5 – 22.9 | 18.5 – 24.9 |
| Overweight | 23 से | 25 से |
| Obesity | 25 से | 30 से |
लेकिन असली बात यह है कि सुधरी हुई BMI सीमाएँ भी काफी नहीं हैं। BMI यह बता ही नहीं सकता कि आपके 70 किलो में 25 किलो मांसपेशी है या 15 किलो। इसीलिए body fat percentage एक बेहतर पैमाना है — और visceral fat उससे भी बेहतर।
Visceral Fat कितना होना चाहिए?
यह सबसे अहम नंबर है, और सबसे कम समझा जाने वाला भी।
शरीर में दो तरह की चर्बी होती है। Subcutaneous fat त्वचा के नीचे होती है — वही जो दिखती है और जिसे आप पकड़ सकते हैं। Visceral fat पेट के भीतर, अंगों के आसपास जमी होती है। यह दिखती नहीं, लेकिन यही ज़्यादा खतरनाक है।
Visceral fat चयापचय के स्तर पर सक्रिय होती है और इसका संबंध insulin resistance, metabolic syndrome और हृदय रोग के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा पाया गया है।
क्लिनिकल मशीनें इसे Visceral Fat Area के रूप में cm² में नापती हैं। यहाँ मानक स्पष्ट है:
- 100 cm² से ऊपर — बढ़े हुए चयापचय जोखिम की क्लिनिकल सीमा।
- इससे नीचे रहना लक्ष्य है, चाहे आपका वज़न कुछ भी हो।
सबसे ज़रूरी बात: visceral fat सामान्य वज़न वाले व्यक्ति में भी बढ़ी हुई हो सकती है। भारत में यह बेहद आम है। वज़न कांटा और BMI दोनों आश्वस्त करते रहते हैं, और भीतर जोखिम बढ़ता रहता है। विस्तार से पढ़ें: visceral fat की सामान्य सीमा और जोखिम।

Body Fat Percentage: किस नंबर पर ध्यान दें
Body fat percentage उम्र और लिंग दोनों के साथ बदलता है। पुरुषों और महिलाओं की सामान्य सीमाएँ अलग होती हैं — महिलाओं में स्वाभाविक रूप से अधिक आवश्यक चर्बी होती है, और यह सामान्य है, कोई कमी नहीं।
उम्र बढ़ने के साथ भी सीमाएँ बदलती हैं, क्योंकि मांसपेशी स्वाभाविक रूप से घटती है जब तक उसे सक्रिय रूप से बनाए न रखा जाए। उम्र और लिंग के अनुसार विस्तृत चार्ट यहाँ है: भारतीय पुरुषों और महिलाओं के लिए body fat percentage चार्ट।
एक चेतावनी ज़रूरी है। Body fat percentage एक अनुपात है — चर्बी बँटा कुल वज़न। इसका मतलब यह है कि अगर आपकी मांसपेशी घट जाए और चर्बी बिल्कुल न बढ़े, तब भी यह प्रतिशत बढ़ जाएगा। इसीलिए इसे अकेले नहीं, मांसपेशी के साथ मिलाकर पढ़ना चाहिए।
असल में सबसे ज़रूरी नंबर: Skeletal Muscle Mass
ज़्यादातर लोग body fat घटाने पर ध्यान देते हैं और मांसपेशी को नज़रअंदाज़ करते हैं। यह उल्टा है।
Skeletal Muscle Mass वह मांसपेशी है जो हड्डियों से जुड़ी है और जिसे आप ट्रेनिंग से बढ़ा सकते हैं। यह आपकी चयापचय दर तय करती है, रोज़मर्रा की ताक़त तय करती है, और उम्र के साथ स्वतंत्रता बनाए रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है।
सबसे आम भारतीय पैटर्न यही है: वज़न तीन महीने से स्थिर, मांसपेशी चुपचाप एक किलो घटी, और उसकी जगह उतनी ही चर्बी आ गई। कांटा कोई बदलाव नहीं दिखाता। शरीर की बनावट पूरी तरह बदल चुकी होती है।

चारों नंबर एक साथ कैसे पढ़ें
| मांसपेशी | चर्बी | मतलब |
|---|---|---|
| बढ़ी | घटी | सबसे अच्छा नतीजा — अक्सर वज़न वही रहता है |
| वही | घटी | अच्छा — चर्बी घटी, मांसपेशी बची रही |
| घटी | घटी | वज़न तो घटा पर मांसपेशी की क़ीमत पर — प्रोटीन और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बढ़ाएँ |
| घटी | बढ़ी | यही रोकने वाला पैटर्न है |
अपना आँकड़ा कैसे पता करें
घर के वज़न कांटे जो “body fat %” दिखाते हैं, वे आमतौर पर सिर्फ पैर से पैर तक करंट भेजते हैं — ऊपरी शरीर तक पहुँचते ही नहीं। इसलिए हाथ और धड़ के बारे में उनकी हर जानकारी अनुमान होती है, माप नहीं।
सही माप के लिए ऐसी मशीन चाहिए जो:
- हाथ और पैर दोनों पर इलेक्ट्रोड लगाती हो (8-point tactile electrodes)
- शरीर के पाँचों हिस्सों की अलग-अलग माप करती हो
- visceral fat अलग से बताती हो
- उम्र या लिंग के आधार पर अनुमान न लगाती हो
पूरी माप लगभग 60 सेकंड लेती है, इसमें कोई विकिरण नहीं होता, और कपड़े उतारने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
नंबर मिलने के बाद क्या करें
- एक बार का नंबर काफी नहीं है। 6–8 हफ्ते बाद दोबारा टेस्ट कराएँ, उसी समय और उसी हालत में।
- अगर मांसपेशी कम है — स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और पर्याप्त प्रोटीन। भारतीय शाकाहारी आहार में प्रोटीन अक्सर कम रह जाता है।
- अगर visceral fat बढ़ी है — यह आहार और गतिविधि दोनों का मामला है, सिर्फ पेट की कसरत का नहीं। शरीर के किसी एक हिस्से से चर्बी घटाना संभव नहीं होता।
- प्रतिशत के पीछे मत भागिए। किलो में मांसपेशी और किलो में चर्बी — दिशा इन्हीं से पता चलती है।
अंदाज़े की जगह माप रखिए
चार्ट सामान्य दिशा बताते हैं। आपका अपना नंबर सिर्फ माप से पता चलता है — और वह एक मिनट का काम है।
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